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अन्योन्य प्रेरण गुणांक की परिभाषा(anyony preran gunaank kee paribhaasha)

अन्योन्य प्रेरण  की परिभाषा(Definition of reciprocal induction;)



हम इसकी परिभाषा को चित्र के अनुसार समझेंगे दो कुंडली रखी हुई है जिसमे से  एक कुंडली में परिवर्तित धारा प्रवाहित किया जाता है तो पास में रखें दूसरी कुंडली से संबंध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तित होने से  दूसरे  कुंडली भी  में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है इस घटना को अन्योंन प्रेरण कहा जाता है
दूसरे शब्दों में अगर इसकी परिभाषा दो से शब्दों में कहते हैं तो आप इस प्रकार से भी पढ़ सकते हैं कि अगर किसी परिपथ या कुंडली में हम धारा के मान को परिवर्तित करते हैं यदि धारा प्रवाहित करते हैं तो उसके पास अगर कोई दूसरी 

कुंडली स्थित है तो चुंबक फ्लक्स के थ्रू विद्युत वाहक बल स्वयं उत्पन्न हो जाता है इस घटना अन्योंन प्रेरण कहा जाता है
चलिए अब हम इसको  विस्तार में जान लेते है
आप उसको समझने के लिए चित्र में ध्यान से आपको देखना होगा चित्र में जैसा कि दिखाया गया है कि दो कुंडली है जो कि एक कुंडली a तथा दूसरा कुंडली b से पारदर्शिता किया गया है पहले वाली कुंडली में एक बैटरी जोड़ा गया है जिसे B   से तथा एक बटन यानी कि कुंजी दिया गया है जिसे s से प्रदर्शित किया गया है  पहले वाले परिपथ में हम एक बैटरी 
जोड़ते हैं तथा एक कुंजी जोड़ते हैं जो उपरोक्त द्वारा प्रदर्शित किया गया है जिसे प्राथमिक कुंडली भी कहा जाता है तथा इसके पास में एक कुंडली रखें गई है जिसे हम B से प्रदर्शित करते हैं  दूसरे कुंडली जो B से प्रदर्शित  किया गया है उसमें एक धारा मापी जोड़ दिया जाता है  जिसे चित्र में द्वितीय कहां जाता है
अब उसके बाद में कुंजी s को चालू कर दिया जाता है
तत्पश्चात प्राथमिक कुंडली में धारा प्रवाहित होने लगती है जिसे i से भी प्रदर्शित करते हैं यहां पर धारा प्रवाहित होने के बाद प्रतिरोध R का मान धारा को परिवर्तित करते हैं जिससे प्राथमिक कुंडली में धारा प्रवाहित होने लगती है 

प्राथमिक कुंडली में धारा प्रवाहित होने के साथ-साथ चुंबकीय फ्लक्स के संबंध में यह चुंबकीय फ्लक्स के थ्रू द्वितीय कुंडली में जो धारा मापी लगा है उसमें विक्षेप उत्पन्न होने लगता है मतलब की उसमें भी धारा का मान बताने लगता है लेकिन अगर प्राथमिक कुंडली की धारा नियत कर दिए जाती है तो द्वितीय कुंडली में कोई भी विक्षेप उत्पन्न नहीं होता है
अगर प्राथमिक कुंडली में धारा का मान अधिक किया जाता है मतलब आप पहले वाले कुंडली में जितना भी अधिक धारा प्रवाहित करेंगे तो दूसरे वाले कुंडली में उतना ही अधिक आप प्रणाम देखने को आपको मिलेगा उतना ही अधिक विक्षेप उत्पन्न होगा द्वितीय कुंडली की प्रेरणा की दिशा  संबंध फ्लक्स का विरोध करती है

मुझे आशा है कि आप को समझ में आ गया होगा यदि आपको सुनने आ गया है तो आप हमारे चैनल को  चैनल सब्स्क्रिब facebook पेज को भी खा लो कर सकते हैं जिससे आपको अच्छे-अच्छे टिप्स  सिखने को मिलेंगे

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