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परपरागण से होने वाले लाभ तथा हानि(paraparaagan se hone vaale laabh tatha haani)

परपरागण से होने वाले लाभ तथा हानि(paraparaagan se hone vaale laabh tatha haani)


 परागण की परिभाषा : किसी पुष्प का Pragkan एक pushap  से निकलकर किसी दूसरे पुष्प के vartikager  तक पहुंचने की क्रिया को परागण कहते हैं

 परपरागण से होने वाले लाभ:  तो चले दोस्तों हम सीख लेते हैं कि परागण से क्या क्या लाभ होता है तथा ऐसे क्या क्या हानियां होती है तो आप इसको अच्छे से पढ़ते रहिए तभी आपको समझ नहीं आएगा इसलिए हम स्टार्ट करते हैं



1. परपरागण  से बनने वाले फल बड़े भारी तथा स्वादिष्ट होते हैं

2. इसमें बीज ओके संख्या अधिक होती है मतलब इसमे बीजो की संख्या अधिक पाई जाती है

3. परपरागण उत्पन्न बीज बड़े भारी स्वस्थ तथा अच्छे नस्ल वाले होते हैं

4. इस बीजो में प्रतिकूल परिस्थितियों का सामान करने की क्षमता रहती है मतलब यह कि यदि मौसम खराब है फिर भी उस पर कम असर पड़ता है क्योंकि वे इन परिस्थितियों से गुजरने की क्षमता रखते है

5. परपरागण के द्वारा रंग अवरोधक जातीय भी तैयार किया जाता है या तैयार किया जा सकता है

परपरागण से होने वाले हानि ;

आपने लाभ के बारे में तो पढ़ लिया अब हम आपको कुछ हानि के बारे में बताने वाले है कि क्या क्या हानि होती है परपरागण से तो आप ध्यान से पढ़ते रहिये


1. परपरागण की क्रिया सम्पन्न होने में बहुत अधिक समय लगता है , इसमे मध्यमः की आवश्यकता  होती है जिससे के इन्हे दूसरे के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है जिससे इस क्रिया में अधिक टाइम लग जाता है

2. इसमे कीटो को आकर्षित करने लिए पुष्प में कुछ मुख्य विशेषता होनी चाहिए जिससे किट अकर्षित हो सके  जैसे रंगदल का चमकीला होना आवश्यक है पुष्प में सुगंध मकरंद आदि उत्पन्न करना जरूरी है

3. इसमे परागकण काफी मात्र में बेकार चले जाते है  

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